रोने का क्या मतलब है कमजोरी का संकेत?HealthPlanet

Posted on Fri 9th Dec 2022 : 13:44

ये मत सोचिए कमजोर ही रोते हैं, रोने के फायदे भी हैं

ये मत सोचिएगा कि रोना केवल आपकी कमजोरी को दिखाता है या केवल कमजोर लोग ही रोते हैं. बल्कि साइंस के तमाम अध्ययन ये बताते हैं कि रोना हेल्थ में एक खास रोल भी निभाता है. अगर आप रोते हैं तो इसके हेल्थ और मूड के हिसाब से बहुत फायदे भी हैं. क्या हैं वो फायदे. साइंस ने अब तक इसके बारे में क्या बताया है.

नीदरलैंड की टिलबर्ग यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च कहती है एक महीने में महिलाएं औसतन करीब 3.5 बार रोती हैं तो पुरुष 1.9 बार. रोने को कमजोरी की निशानी माना जाता है. लेकिन रिसर्च कहती है कि रोना बहुत जरूरी है. ये हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद है. रोने से शरीर औऱ दिमाग दोनों पर पाजिटीव असर पड़ता है. अक्सर रो लेने में कोई बुराई नहीं.


आंसू हमारे दिल और दिमाग का हाल जाहिर करते हैं. वैसे रोने की मुकम्मल परिभाषा 1662 तक थी. किसी को अंदाज भी नहीं था कि रोने का रिश्ता आंसुओं से कैसे बन जाता है. तब डेनिस साइंटिस्ट ने पहली बार बताया कि ये आंसू दरअसल आते कहां से हैं. बकौल उनके हमारी दोनों आंखों के किनारे के ऊपर सिरे पर एक छोटी सी द्रव की थैली होती है, जिसे लैक्रीमल ग्लैंड कहते हैं आंसू वहीं से आते हैं.


लेक्रिमल ग्लैंड काम करती है, जो आईबॉल और आईलिड के बीच होती है. अगर आंसू बहुत तेजी से और ज्यादा देर तक आते रहें तो ग्लैंड ये दबाव बांट देती है. यही कारण है कि तेजी से रोने पर आंखों के साथ-साथ नाक भी बहने लगती है. ये भी आंसू ही होते हैं लेकिन नाक से गुजरने पर म्यूकस के कारण चिपचिपे लगने लगते हैं.



ये द्रव आंख की सुरक्षा और आंख की अच्छी सेहत के लिए भी जरूरी है. आंख पर ऊपरी सतह पर हमेशा द्रव रहना चाहिए. अगर सूखी हो जाएगी तो कई तरह की आंख संबंधी बीमारियों को जन्म देगी. रोने से हमारे शरीर में तनाव के कारण जो टॉक्सिन जमा हो जाते हैं उन्हें रिलीज करने का भी आंसुओं के साथ होता है. वैसे रोते समय जो द्रव आंखों के आंसूओं के साथ बाहर आता है, वो लिसोजीम होता है, जिसका काम आंखों को हमेशा तर रखना है.


2011 की एक स्टडी कहती है लिसोजीम में कई एंटी बैक्टीरियल तत्व होते है जो आंखों को बैक्टीरिया से बचाते हैं. 1985 में बॉयोकेमिस्ट विलियम फ्रे ने बताया, रोने का उद्देश्य टाक्सिक तत्वों को बाहर निकालना भी होता है. रोने से आक्सीटोन और इंडोजेनियस ओपॉएड्स रिलीज होते हैं. इन्हें फीलगुड केमिकल कहा जाता है. ये हमारे स्ट्रेट मैनेजमेंट के लिए जरूरी हैं और बेहतर फील के लिए भी.

वैसे वैज्ञानिक आंसुओं को कई श्रेणियों में रखते हैं लेकिन तीन मोटी श्रेणियां मानी जाती हैं. पहली श्रेणी है बेसल. ये नॉन-इमोशनल आंसू हैं, जो आंखों को सूखा होने से बचाते हैं और स्वस्थ रखते हैं. दूसरी श्रेणी में भी नॉन-इमोशनल आंसू ही आते हैं, जो किसी खास गंध पर प्रतिक्रिया से आते हैं. जैसे प्याज काटने या फिनाइल जैसी तेज गंध पर आने वाले आंसू.


आंसुओं की तीसरी श्रेणी ही वो है, जिसपर हमेशा चर्चा होती रही. इसे क्राइंग आंसू कहते हैं. ये भावनात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर आते हैं. ये कैसे काम करता है, इसे थोड़ा समझते हैं. हमारे मस्तिष्क में एक लिंबिक सिस्टम होता है. ये वही हिस्सा है, जिसमें ब्रेन का हाइपोथैलेमस होता है. ये नर्वस सिस्टम से सीधे संपर्क में रहता है. इसी सिस्टम का न्यूरोट्रांसमिटर संकेत देता है और किसी भावना के एक्सट्रीम पर हम रो पड़ते हैं. ये केवल दुख ही नहीं, बल्कि गुस्सा या डर भी हो सकता है.

रोने के फायदे मनोविज्ञान से भी जुड़े हैं. रोने के बाद आप हल्का महसूस करेंगे. तनाव और दबाव कुछ हद तक खत्म हो जाएगा. दर्द कम लगने लगेगा। शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्तर अच्छा फील करते हैं. कुछ राहत महसूस करते हैं. कुछ लोग रोते हैं और कुछ नहीं. कुछ के लिए रोना आसान है, कुछ के लिए कतई नहीं.


लेकिन अगर आप ज्यादा रो रहे हैं तो फिर ये डिप्रेसन का संकेत है. इससे दूसरी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. अगर लंबे समय से आप रोने वाली स्टेज में हैं तो डिप्रेशन के साथ साथ उदासी, अति संवेदनशीलता और काम में मन नहीं लगना जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. ऐसे में तुरंत डॉक्टर का रुख करना चाहिए. ये स्थिति तनाव, उदासी को और बढ़ा सकती है तो सोने में अनिद्रा जैसी शिकायत को जन्म दे सकती है. इस तरह के रोने को खराब रोना में मान जाएगा. अगर आप नहीं रो पा रहे हैं तब भी ये मामला डिप्रेशन से जुड़ा हो सकता है, जिसे मेलेनकोलिक डिप्रेशन कहा जाता है. कुछ लोगों को रोने के बाद भी आंसू नहीं निकलते, ऐसे में डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

तो कुल मिलाकर रोना दो तरह का होता है एक अच्छा रोना, जो कुछ रोने के बाद आपको बेहतर या हल्का महसूस करा सकता है और दूसरा खराब रोना, जो किसी भी दृष्टि से अच्छा नहीं कहा जाएगा.

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info